श्री गणेशाय नमः

IMG_20190328_121031
IMG_20190328_121031
IMG_20190625_183833
IMG_20190625_183833
IMG_20190625_193212
IMG_20190625_193212
IMG_20191020_162634
IMG_20191020_162634
IMG_20240810_173257
IMG_20240810_173257
IMG_20240810_184237
IMG_20240810_184237
previous arrow
next arrow

 

 

*वेद विद्या गुरुकुलम् का मुख्य उद्देश्य*

वेद विद्या गुरुकुलम् का मुख्य उद्देश्य है वैदिक वांग्मय, वेदराशि, और श्वर प्रक्रिया सहित मानव जाति में ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना। यह गुरुकुल वेदों की मौलिक शिक्षा देने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो हमारे प्राचीन ऋषियों द्वारा स्थापित किए गए शिक्षाओं और परंपराओं को बनाए रखने की कोशिश करता है।

इसका प्रमुख उद्देश्य उच्चारण विधि की मौखिक परंपरा को यथावत शिष्य-प्रशिष्य तक पहुंचाना है, ताकि वेदों का सही प्रकार से अध्ययन किया जा सके। हमारे ऋषियों द्वारा दी गई शास्त्रीय शिक्षा और तत्त्वज्ञान को अक्षुण्ण रखने के लिए यह विशेष ध्यान दिया जाता है।

वेद विद्या गुरुकुलम् की स्थापना 17 सितम्बर 2004 को हुई थी, और इसके अंतर्गत विभिन्न विषयों का अध्ययन कराया जाता है। इनमें वेदाध्ययन, संस्कृत, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर, और योग शामिल हैं।

यह गुरुकुल महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान और महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत विद्या बोर्ड (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, उज्जैन) द्वारा मान्यता प्राप्त है। साथ ही, यह संस्था शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्य और भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा भी मान्यता प्राप्त है।

गुरुकुल की अवधारणा

आधुनिक दुनिया में *गुरुकुल* की अवधारणा कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्राचीन ज्ञान को समकालीन आवश्यकताओं के साथ जोड़ता है। यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं, जिनकी वजह से गुरुकुल आज भी महत्वपूर्ण हैं:

1. *प्राचीन ज्ञान का संरक्षण*: गुरुकुल प्राचीन भारतीय ज्ञान के संरक्षक होते हैं, विशेष रूप से वेद, संस्कृत, दर्शन और पारंपरिक विज्ञान के क्षेत्रों में। तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के इस युग में, इन सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण यह सुनिश्चित करता है कि पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा ज्ञान नष्ट न हो।

2. *समग्र शिक्षा*: आधुनिक शिक्षा प्रणालियों के मुकाबले गुरुकुल समग्र और संतुलित शिक्षा प्रदान करते हैं। यहां न केवल शैक्षिक विषयों का अध्ययन कराया जाता है, बल्कि आत्मिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता है, जिससे छात्रों में नैतिकता, अनुशासन और मूल्यों का विकास होता है।

3. *व्यक्तिगत ध्यान*: गुरुकुलों में शिक्षक (गुरु) और छात्र (शिष्य) के बीच व्यक्तिगत संबंध होता है, जिससे प्रत्येक छात्र को एक-एक कर ध्यान और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। यह तरीका बड़े और अव्यक्त विद्यालयों में अक्सर नहीं मिलता।

4. *सततता और पर्यावरणीय जागरूकता*: गुरुकुलों में प्रायः पर्यावरणीय संरक्षण और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे छात्रों में प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान और जागरूकता विकसित होती है। इस समय जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट बढ़ रहा है, यह दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

5. *आध्यात्मिक और मानसिक कल्याण*: आधुनिक जीवन में मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं, और गुरुकुल छात्रों को ध्यान, योग और मानसिक शांति के अभ्यास के माध्यम से आंतरिक संतुलन बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं।

6. *समुदाय की भावना का पोषण*: गुरुकुलों में एक सशक्त और सहयोगात्मक समुदाय बनाने पर जोर दिया जाता है, जहां एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना, आपसी सम्मान और साझा मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। आज के एकल और विभाजित समाज में, यह सामूहिक समर्थन और जुड़ाव अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

7. *नैतिक मूल्यों की शिक्षा*: गुरुकुल समाज में नैतिकता, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रचार करते हैं। वर्तमान में जब कभी-कभी व्यक्तिगत लाभ सामूहिक भलाई से ऊपर हो जाता है, तो गुरुकुल समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में सहायक होते हैं।

8. *परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु*: गुरुकुल न केवल प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को सम्मानित करते हैं, बल्कि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सामाजिक अध्ययन जैसे आधुनिक विषयों को भी अपनाते हैं। इससे एक संतुलित पाठ्यक्रम तैयार होता है, जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करता है, जबकि उनकी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखता है।

9. *आध्यात्मिक संतुष्टि*: इस समय जब भौतिकवाद को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, गुरुकुल छात्रों को आत्मिक विकास और आत्मसाक्षात्कार के मार्ग पर चलने का अवसर प्रदान करते हैं। यह उस समाज में महत्वपूर्ण है जो कभी-कभी बाहरी सफलता के पीछे आत्मिक शांति को भूल जाता है।

संक्षेप में, गुरुकुल प्रणाली एक अनूठा और संतुलित शिक्षा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो आधुनिक दुनिया की कई समस्याओं का समाधान प्रदान कर सकती है, जैसे सांस्कृतिक धरोहर से अलगाव, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, और नैतिक मार्गदर्शन की कमी। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के मेल से गुरुकुल समग्र और विचारशील व्यक्तियों का निर्माण कर सकते हैं, जो समाज में सकारात्मक योगदान देने में सक्षम हों।

paas vidyarthi
5 k+
year's of Experience
10 +
Cool Number
0
Cool Number
0

*संघर्ष और सफलता की कहानी: विष्णु प्रसाद गौतम, प्राचार्य, वेदविद्या गुरुकुलम्*

हरिसिंगा, असम के छोटे से गांव में जन्मे विष्णु प्रसाद गौतम ने बचपन से ही शिक्षा और संस्कृति को अपनी प्राथमिकता बनाया। कठिन आर्थिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने वैदिक और योग शिक्षा के क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू की। दिल्ली, प्रयागराज, और वाराणसी जैसे शिक्षा केंद्रों में अध्ययन करते हुए, उन्होंने संस्कृत व्याकरण में आचार्य की उपाधि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्राप्त की।

उनकी वैदिक शिक्षा और सेवा की शुरुआत सन् 2000 में हुई, जब वे प्रथम बार वेदाध्यापक के रूप में चयनित हुए। प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर, अयोध्या, और विंध्याचल जैसे विभिन्न स्थानों पर काम करते हुए, उन्होंने न केवल शिक्षा दी, बल्कि वैदिक ज्ञान के महत्व को ग्रामीण और शहरी समाज में फैलाने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों से असंख्य छात्रों ने वैदिक शिक्षा में अपनी जड़ें मजबूत कीं।

2004 में, उन्होंने पनवेल, नवी मुंबई में जनकल्याण सेवाश्रम के सहयोग से 10 छात्रों के साथ एक वेद पाठशाला की शुरुआत की। यह उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम था कि यह पाठशाला धीरे-धीरे बढ़ती गई और आज, वारियर फाउंडेशन के साथ काम करते हुए, उन्होंने इसे वेदविद्या गुरुकुलम् के रूप में स्थापित कर दिया है।

विष्णु प्रसाद गौतम ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया। सीमित संसाधनों और सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनका लक्ष्य केवल वैदिक ज्ञान देना नहीं था, बल्कि छात्रों के समग्र विकास और उनके जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाना था।

उनकी मेहनत और समर्पण को मान्यता भी मिली। सन् 2008 में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान और सन् 2022 में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड, उज्जैन (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा उनके कार्य को मान्यता दी गई।

आज, विष्णु प्रसाद गौतम वेदविद्या गुरुकुलम् के प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। वे न केवल छात्रों को शिक्षा देते हैं, बल्कि उन्हें वैदिक परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। उनका जीवन संघर्ष, सेवा, और समर्पण की मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

खोज की यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें

चाहे आप वेदों के बारे में अपने ज्ञान को गहरा करना चाहते हों, आध्यात्मिक मार्ग अपनाना चाहते हों, या बस भारतीय परंपराओं की समृद्ध विरासत का पता लगाना चाहते हों, वेद विद्या गुरुकुलम एक परिवर्तनकारी अनुभव प्रदान करता है। हमारा गुरुकुलम सभी पृष्ठभूमि के छात्रों का स्वागत करता है जो सीखने और व्यक्तिगत विकास के बारे में भावुक हैं। हमारे कार्यक्रमों का अन्वेषण करें, हमारे समर्पित आचार्गाओं से मिलें, और जानें कि वेद विद्या गुरुकुलम किस प्रकार ज्ञान और आत्मज्ञान की ओर आपकी यात्रा का हिस्सा बन सकता है।

हमारे साथ जुड़ें

हमारे कार्यक्रमों, प्रवेश प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए या किसी यात्रा का समय निर्धारित करने के लिए, कृपया हमसे 8779672548, vedavidhyagurukulamis@gmail.com पर संपर्क करें या हमारे (हमसे संपर्क करें) पृष्ठ पर जाएँ। प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने और उसका जश्न मनाने में हमारा साथ दें जो पीढ़ियों को प्रेरित और मार्गदर्शन करता रहता है।

Veda Vidya Gurukulam

जहाँ प्राचीन ज्ञान आधुनिक शिक्षा से मिलता है

वेद विद्या गुरुकुलम में, हम वैदिक शिक्षा की शाश्वत परंपरा का सम्मान करते हैं और उसे जारी रखते हैं। शांत और पवित्र वातावरण में बसा हमारा गुरुकुलम वेदों की गहन शिक्षाओं के माध्यम से छात्रों के मन और आत्मा को पोषित करने के लिए समर्पित है।

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

Quick links

Academic Calender

Copyright @ 2024. vedavidyagurukulam. All Rights Reserved.